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UP Election 2022

UP election 2022: Unemployment rate in the Yogi’s regime

Since Yogi Government took over in 2017, the unemployment rate of UP was 17.5%. According to the latest report released by the Centre for Monitoring Indian Economy.

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UP CM
Source: @keshavyadaviyc (Twitter)

Since Yogi Government took over in 2017, the unemployment rate of UP was 17.5%. According to the latest report released by the Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE), UP is ahead of states like Delhi, Punjab, Rajasthan, West Bengal, Kerala, and Tamil Nadu in providing employment. UP recorded an unemployment rate of 6.9%, which is three times less than what it was in March 2017. It seems to be a major achievement for the Yogi government in Uttar Pradesh.

Unemployment rates in Delhi and Rajasthan were dreadful 45.6% and 27.6% respectively, along with states West Bengal (19.3%), Tamil Nadu (28%), Punjab (8.8%), Jharkhand (16%), Chhattisgarh (8.3%) Kerala (23.5%) and Andhra Pradesh (13.5%) were higher than UP.

Decrease in the unemployment rate

Due to Covid- 19 pandemic, experienced people have lost their jobs and are now left with no options other than taking whatever jobs to meet their ends meet. On the other hand, the report says that there is much more enhancement in employment when it comes to UP state.

Government spokesman Sidharth Nath Singh said that a milestone has been achieved by the Yogi government, in spite of having several challenges, especially when COVID- 19 is at its peak that brought economic activity across the world to a halt over two years. It leads to forcing companies either to shut down or lay off jobs. The policies and employment-oriented schemes of the Government have played a crucial role in this major accomplishment.

Nevertheless, the unemployment rate hit a record low of 4.1% in March this year. Meanwhile, the second Covid wave hit all over, the government left no stone unturned to provide jobs to a large number of youths. Below the Mission Rozgar- different departments, institutions, and corporations of state are providing employment opportunities to unemployed people.

The number of job opportunities given in the time of the Yogi government is gradually higher than what was offered under SP and BSP governments together. Only 91,000 jobs were given under the BSP administration between 2007 and 2012. Two lakh government jobs were given during the Samajwadi regime (2012-2017).

Achievements of UP CM Yogi’s government 

Chief minister Yogi Adityanath completed a duration of four years in March. Apparently, he has a lengthy list of accomplishments to claim, but his government faces ample challenges on several fronts ahead of the 2022 assembly elections (UP). A 64 pages book named “Chunotiyon main talaashe avsar” (Challenges turned into opportunities) has been introduced which has been listing the achievements of Yogi’s government in multiple domains in the “four years of service and good governance.”

A report of the Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) makes a point about the rate of unemployment coming down from 17.5 percent to 4.1 percent in the state. It states work of metro rail project has taken place, on the contrary Meerut is soon going to get a gift of metro rail. Light metro will soon be launched in Gorakhpur, Varanasi, Prayagraj, and Jhansi which precisely will give lots of employment to people.

CM wants the major development projects to be completed in the next few months. Along with he is analyzing the progress of expressway projects and launched drinking water projects for the Bundelkhand region. The state government will eventually have to accelerate action and monitor the improvement of projects. He has an eye on all the activities before the state will go into assembly poll mode.

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UP Election 2022

उत्तर प्रदेश से संगठन में नई जान लाना चाह रही हैं प्रियंका गांधी

लखनऊ में गांधी प्रतिमा के आगे प्रियंका ने मौन व्रत करके योगी सरकार को कड़ा संदेश दिया ही. साथ ही संकेत भी दिए कि आगामी दिनों में कांग्रेस पार्टी प्रदेश सरकार पर और भी आक्रमक होगी.

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उत्तर प्रदेश से संगठन में नई जान लाना चाह रही हैं प्रियंका गांधी
Source: @priyankagandhi

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं. वैसे-वैसे राजनीति जोर पकडती जा रही है. और जब से प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव हुए हैं तब से राज्य की राजनीति नई करवट लेने लगी है. एक ओर कई बैठकों के भारतीय जनता पार्टी योगी आदित्यनाथ के ही नेतृत्व में सियासी रण में उतरने का ऐलान कर चुकी है, वहीं बाकी दल भी नए साथी या खुद के दम पर लोहा लेने की पूरी तैयारी में जुट गए हैं. इन्हीं सब हलचलों के बीच प्रियंका गांधी के यूपी दौरे पर हर किसी की पैनी नजर है.

उत्तर प्रदेश प्रवास के पहले दिन प्रियंका गांधी ने पहले लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. उसके बाद वो वहीं मौन व्रत व धरने पर बैठ गयीं. जिसके बाद वहां हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा. राजनैतिक पंडित बताते हैं कि कांग्रेस में ऐसी उर्जा का संचार कई वर्षों के बाद देखने को मिला. कार्यकर्ताओं के हुजूम और उत्साह को देखकर प्रियंका गांधी निश्चित ही खुश हुई होंगी.

लखनऊ में गांधी प्रतिमा के आगे प्रियंका ने मौन व्रत करके योगी सरकार को कड़ा संदेश दिया ही. साथ ही संकेत भी दिए कि आगामी दिनों में कांग्रेस पार्टी प्रदेश सरकार पर और भी आक्रमक होगी. मौन व्रत के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर चुन-चुनकर हमला बोला.

उन्होंने प्रदेश की बिगडती कानून व्यवस्था व कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान अव्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला. साथ ही उन्होंने ट्विटर से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरा. उन्होंने ट्वीट करके कहा मोदी जी के सर्टिफिकेट से यूपी में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान योगी सरकार की आक्रामक क्रूरता, लापरवाही और अव्यवस्था की सच्चाई छिप नहीं सकती. लोगों ने अपार पीड़ा, बेबसी का सामना अकेले किया। इस सच्चाई को मोदीजी, योगीजी भूल सकते हैं, जिन्होंने कोरोना का दर्द सहा, वे नहीं भूलेंगे.”

लखीमपुर की पीड़ित महिला से मिलकर लगाया दर्द पर मरहम

लखीमपुर खीरी में प्रियंका ने पसगंवा ब्लॉक निवासी उस महिला से मुलाकात की, जिनके साथ ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में अभद्रता हुई थी. नामांकन वाले दिल महिला की साड़ी खींचने का मामला सामने आया था. साथ ही प्रियंका ने दूसरी महिलाओं से भी भेंट की.

उन्होंने बीजेपी व सरकार को चेतवानी देते हुए कहा कि, “लोकतंत्र का चीरहरण करने वाले भाजपा के गुंडे कान खोलकर सुन लें, महिलाएँ प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनेंगी और उनपर अत्याचार करने वालों को शह देने वाली सरकार को शिकस्त देंगी. पंचायत चुनाव में भाजपा द्वारा की गयी हिंसा की शिकार अपनी सभी बहनों, नागरिकों के न्याय के लिए मैं राज्य चुनाव आयोग को पत्र लिखूँगी.”

परिणाम पक्ष में नहीं आए तो करवा दी हिंसा

पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने लोगों की परवाह किए बिना पंचायत चुनाव करवाए, क्योंकि उसने यह सोचा था कि परिणाम उसके पक्ष में आएंगे. मगर परिणाम उनकी इच्छा के अनुसार नहीं आए. इसलिए जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख चुनावों में हिंसा करवा दी.

अराजकता प्रदेश सरकार खुद फैला रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा राज में संविधान पर प्रहार की घटनाएं पहली बार नहीं हो रही हैं, लेकिन अब स्तर इतना गिर गया है कि प्रशासन, पुलिस और हर चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है. हम यहां लोकतंत्र के पक्ष में खड़े होने आए हैं.

यूपी विधानसभा चुनावों से कांग्रेस में नई जान फूंकना चाहती हैं प्रियंका

राजनीति पर नजर रखने वाले कहते हैं कि प्रियंका समेत कांग्रेस पार्टी को समझ आ चूका है कि बिना उत्तर प्रदेश के दिल्ली बहुत दूर है. 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हैं. जिसे अच्छा मौका मानते हुए कांग्रेस अपने लिए मौके बना रही है. अगर बात करें प्रियंका गांधी की तो वो सक्रिय राजनीति में 2019 के आम चुनाव से पहले ही आईं थीं.

उस वक्त भी वह उत्तर प्रदेश में ही सक्रिय रही थीं. लेकिन तब के हालात बहुत अलग थे. अब जनता में मौजूदा सरकार के प्रति रोष है. जिसे कांग्रेस अपने पक्ष में भुनाना चाह रही है. और इसी रणनीति के तहत प्रियंका गांधी सक्रिय हुई हैं. जानकार बताते हैं कि अगर प्रियंका गांधी यूँ ही सक्रियता बनाये रखती हैं तो कार्यकर्त्ता भी मन से काम करेंगे और संगठन में नई जान भी आएगी. लेकिन अगर पिछले कुछ वक्त को देखें तो पार्टी में किसी भी मुद्दे को लेकर सक्रियता सिर्फ कुछ दिनों तक ही रही है.

 

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UP Election 2022

आखिर क्यों चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बढ़ते ही जा रहे हैं दलित उत्पीड़न के मामले ?

उत्तर प्रदेश में दलितों के कथित उत्पीड़न और उनके घरों में तोड़-फोड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ऐसी दो घटनाएं कानपुर देहात और चंदौली में हुई हैं.

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उत्तर प्रदेश में दलितों के कथित उत्पीड़न और उनके घरों में तोड़-फोड़ की घटनाएं
Source: @priyankagandhi

उत्तर प्रदेश में दलितों के कथित उत्पीड़न और उनके घरों में तोड़-फोड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ऐसी दो घटनाएं कानपुर देहात और चंदौली में हुई हैं. सोशल मीडिया पर दलित उत्पीड़न से संबंधित इन घटनाओं के वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई, जबकि एक अन्य मामले में पीड़ितों ने आजमगढ़ पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने और तलाशी के बहाने उनके घरों को तोड़ने के आरोप लगाए.

पुलिस ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया है. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दलित उत्पीड़न की इन घटनाओं पर जवाब मांगा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दलित उत्पीड़न का ताजा मामला बीते आठ जुलाई को कानपुर देहात का है, जहां कुछ लोगों ने सार्वजनिक तौर पर 19 साल के एक युवक के बाल पकड़कर उसे खींचा और लात-घूसों से उसकी पिटाई की, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीते 10 जुलाई को मामला दर्ज किया गया.

पुलिस अधिकारी का क्या कहना है ?

पुलिस अधिकारी का कहना है, ‘कानपुर देहात की पुलिस ने इस घटना में शामिल चार लोगों को बीते रविवार को गिरफ्तार किया. घटना के वीडियो में नजर आ रहे लोगों को पकड़ने के लिए छापेमारी की गई. वहीं, पीड़ित का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है.’

बता दें कि बीते 10 जुलाई को दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें पेड़ से बंधे एक युवा को कुछ लोग पीटते दिखाई दे रहे हैं. ये लोग पीड़ित के निजी अंग में डंडा डालते नजर आ रहे हैं और उसकी जाति को लेकर उससे सवाल कर रहे हैं.

पीड़ित की पहचान श्रवण के तौर पर हुई

पुलिस का कहना है कि मामले में जांच शुरू कर दी गई है. पीड़ित की पहचान श्रवण के तौर पर हुई है, जो एक टेंट हाउस में काम करता है. कानपुर देहात के सर्किल ऑफिसर अरुण कुमार सिंह ने कहा, ‘शुरुआती जांच से पता चलता है कि प्रेम संबंधों को लेकर युवक से मारपीट की गई. अकबरपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है.’ सिंह ने कहा, ‘वीडियो में दिखाई दे रहे चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अन्य की तलाश में छापेमारी की जा रही है.’

वहीं, एक अन्य मामले में चंदौली पुलिस ने बरथारा खुर्द गांव में जमीन विवाद को लेकर दलित परिवार पर कथित तौर पर हमला करने और उनके घर को आग के हवाले करने के लिए बीते 10 जुलाई को ठाकुर समुदाय के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया.

कई मकानों को तोड़ा गया, सैकड़ों पर मुकदमा दर्ज किया।

क्या-क्या हुआ नुकसान?

यह घटना आठ जुलाई को हुई, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई. वीडियो क्लिप में लाठी-डंडों के साथ कुछ लोगों को देखा जा सकता है, जो अन्य लोगों को धमका रहे हैं. पीड़ित के घर को भी आग लगा दी गई. पीड़ितों में से एक वैजंती देवी की शिकायत के आधार पर दर्ज शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने घर को आग लगाने से पहले उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों की पिटाई की.

चंदौली के एसीपी दयाराम का कहना है कि एफआईआर में नामजद चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अन्य को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है.

पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि के साथ ही पीड़िता वैजंती देवी का घर है और आरोपियों का कहना है कि दलित परिवार उनकी जमीन पर कूड़ा-कचरा फेंकता था.

बता दें कि लगभग एक हफ्ते पहले दलित परिवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें आजमगढ़ जिले के रौनापार थानाक्षेत्र के पलिया गांव में उनके घर को कुछ लोग क्षतिग्रस्त करते देखे जा सके हैं. परिवार ने पुलिस पर 29 जून को उनके घर में तोड़-फोड़ करने का आरोप लगाया है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि 29 जून को पुलिस की एक टीम उनके घर पहुंची, तलाशी के बहाने उनके घर में तोड़-फोड़ की और उनसे मारपीट की. वहीं, पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है.

ग्राम प्रधान के मकान में हुई तोड़फोड़

पुलिस ने बताया था कि पलिया गांव के मुखिया और उसके साथियों ने 29 जून को एक व्यक्ति की पिटाई की, क्योंकि उन्होंने मुखिया के बेटे और अन्य द्वारा कुछ लड़कियों को परेशान करने का वीडियो बना लिया था. ये लोग दो पुलिसकर्मियों से मारपीट के भी आरोपी हैं. आरोप है कि  पुलिस पर हमले के बाद देर रात पुलिस ने दलित बस्ती की घेराबंदी की. मुख्य आरोपी बताए जा रहे ग्राम प्रधान के मकान में तोड़फोड़ की और मकान को गिरा दिया.

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके घरों में लूटपाट भी की. पुलिस की कार्रवाई को देखकर ग्रामीण सहम गए और इसके बाद पुरुष व बच्चे घर छोड़कर भाग गए. दूसरे दिन पुलिस ने 11 नामजद व 135 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं.

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UP Election 2022

आखिर क्यों 12 केंद्रीय मंत्रियों को मोदी कैबिनेट से किया गया आउट ?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का दो सालों बाद मंत्रीमंडल विस्तार कर लिया. इस दौरान कई मंत्रियों को प्रमोशन मिला तो कई मंत्रियों को मोदी कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया.

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Cabinet Reshuffle
Source: The Indian Express

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का दो सालों बाद मंत्रीमंडल विस्तार कर लिया. इस दौरान कई मंत्रियों को प्रमोशन मिला तो कई मंत्रियों को मोदी कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया. अभी तक मंत्रीमंडल में 53 मंत्री थे. जिनमें से 12 मंत्रियों को इस्तीफा दिलाया गया. कहने को तो इनमे से कुछ की वजह स्वास्थ्य बताया गया.

लेकिन असली वजह कुछ और ही थी. इस्तीफों की शुरुआत थावरचंद गहलोत से हुई थी. उन्हें राज्यपाल बनाकर एडजस्ट कर दिया गया. बकाया 11 मंत्रियों का क्या होगा. यह कोई नहीं जानता.

कौन हैं इस्तीफे वाले 12 मंत्री

1. रविशंकर प्रसाद
2. प्रकाश जावड़ेकर
3. थावर चंद गहलोत
4. रमेश पोखरियाल निशंक
5. हर्षवर्धन
6.सदानंद गौड़ा
7. संतोष कुमार गंगवार
8. बाबुल सुप्रियो
9. संजय धोत्रे
10. रत्तन लाल कटारिया
11. प्रताप चंद सारंगी
12. देबोश्री चौधरी

थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया

केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत मंगलवार को ही इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद मंत्रीमंडल विस्तार की खबरों ने और जोर पकड़ लिया था. उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है,. वे मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में मंत्री रहे हैं. अभी तक वे केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय संभाल रहे थे.

कोरोना ने लील लिया इन तीन मंत्रियों को

जब से कोरोना आया. तब से मोदी सरकार कई मोर्चों पर विफल हो रही थी. फिर चाहे वो स्वास्थ्य को लेकर हो या फिर रोजगार को लेकर. कहने को तो लॉकडाउन की वजह से पढाई-लिखाई बंद सी रही. लेकिन छात्रों ने तमाम विषयों को लेकर सरकार को इस मोर्चे पर खूब घेरा. ऐसे कई मौके देखने में आये जब सरकार को इन मोर्चों पर चुप्पी साधनी पड़ी. उसके पास सवालों के कोई जवाब नहीं थे.

स्वास्थ्य मंत्रालय– दूसरी लहर में फेल रहे. इसलिए उन्हें हटाया गया.
शिक्षा मंत्रालय – नई शिक्षा नीति का सरकार को उतना श्रेय नहीं मिला. दोनों मंत्री हटाए.
श्रम मंत्रालय- श्रमिकों के पलायन, सुप्रीम कोर्ट की फटकार, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पोर्टल नहीं बना पाए.

पश्चिम बंगाल में मिली हार का शिकार बने दो बंगाली मंत्री

बाबुल सुप्रियो

बाबुल सुप्रियो केंद्र सरकार में मंत्री थे. इसके बावजूद उन्हें विधानसभा चुनावों में उतारा गया. पार्टी को उम्मीद थी कि वो अपने साथ-साथ कई अन्य उम्मीदवारों को जिता कर विधानसभा पहुचाने का काम करेंगे. लेकिन हुआ इसका बिलकुल उलट. ऐसा मंत्री होकर भी विधायक का चुनाव हारे. बंगाल इलेक्शन में वो बिलकुल फेल हो गये. कार्यकर्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार भी न था.

देबोश्री चौधरी

बंगाल चुनाव में असर नहीं छोड़ पाईं। इनका न ही आम लोगों से रिश्ता जमा रहा है, न ही वो मिनिस्ट्री में कुछ कर पाईं. यहाँ तक जब उन्होंने इस्तीफा दिया, तब लोगों ज्ञात हुआ कि केंद्र में यह भी मंत्री थीं.

12 मंत्रियों में से 10 मंत्री 60 साल के ऊपर

1. थावरचंद गहलोत: 73 साल

मध्यप्रदेश के शाजापुर से लोकसभा सदस्य रहे चुके हैं. मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद बने. राज्यसभा में सदन प्रमुख भी रहे. पहली मोदी सरकार में सामाजिक न्याय व सशक्तीकरण मंत्रालय में मंत्री रहे. उन्हें कर्नाटक का गवर्नर बनाया गया है.

क्यों हटाया गया: गहलोत को गवर्नर बनाया गया और उनके जाने से 5 पद खाली हो सके जो कैबिनेट रीशफल में उपयोगी रहे. वो अपनी मिनिस्ट्री में खूब धीमे माने जाते थे.

2. संतोष गंगवार: 72 साल

उत्तर प्रदेश के बरेली से लोकसभा सांसद. वित्त मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं. मोदी 2.0 की पहली कैबिनेट में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे.

क्यों हटाया गया: काफी सच बोलते थे. उन्होंने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ खत लिखा था. कहा जा रहा है कि यही उन्हें हटाने की वजह बनी. खबरें यहाँ तक भी हैं कि उन्होंने राज्य सरकार में बरेली से ही एक विधायक मंत्री को हटाने के लिए लाबिंग की थी. वो अब संगठन में ऊँचे पड़ पर पहुंच गये. उन्होंने अब इन्हें हटाने में लाबिंग कर दी.

3. प्रकाश जावडेकर- 70 साल

महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद. मोदी मंत्रिमंडल में संसदीय कार्य मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री, भारी उद्योग व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री और सूचना व प्रसारण मंत्री रहे हैं.

क्यों हटाया गया: जावडेकर का इस्तीफा आज के दिन की बड़ी खबर रही. वे सरकार के प्रवक्ता थे, लेकिन सरकार का पक्ष ठीक से नहीं रख पाए. पर्यावरण मिनिस्ट्री में भी उनकी लीडरशिप और कुछ फैसलों पर काफी सवाल उठे थे. उनके कई फैसले विवादास्पद रहे.

4. रतन लाल कटारिया- 69 साल

2014 में हरियाणा के अंबाला से लोकसभा सांसद बने. मोदी 2.0 की पहली कैबिनेट में जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री थे.

क्यों हटाया गया: न ही उन्हें मिनिस्ट्री चलानी आई और न ही वे मास कॉटैक्ट रख सके.

5. सदानंद गौड़ा: 68 साल

बेंगलुरु उत्तर से लोकसभा सांसद. मोदी सरकार में रेलवे मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय संभाल चुके हैं. वर्तमान में रसायन व उर्वरक मंत्री थे.

क्यों हटाया गया: अपने खराब परफॉर्मेंस और कर्नाटक के बदलते समीकरणों के कारण पद गंवा बैठे. अब कर्नाटक मामलों में भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष की ही चलती है.

6. रविशंकर प्रसाद- 66 साल

पटना साहिब से लोकसभा सांसद. अटल सरकार के दौरान कोयला मंत्रालय, कानून व न्याय मंत्रालय और सूचना व प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा संभाला. मोदी सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, कानून व न्याय मंत्री, इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और संचार मंत्री रहे.

क्यों हटाया गया: रवि शंकर प्रसाद को मंत्रिमंडल से निकला जाना सबसे बड़ा सरप्राइज है. ऐसा माना जा रहा है कि नए IT कानूनों पर सरकार का पक्ष ठीक से नहीं रख पाए. ज्यूडिशियरी से लेकर ग्लोबल IT कंपनियों तक उनके फैसलों पर सवाल उठते रहे.

7. डॉ. हर्षवर्धन- 66 साल

दिल्ली के चांदनी चौक से लोकसभा सांसद. मोदी सरकार में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री थे.

क्यों हटाया गया: कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी रही, जिसे इन्हें मंत्री पद से हटाने की वजह माना जा रहा है. डॉक्टर होते हुए भी हालात काबू में नहीं रख पाए और न ही आम जनता को राहत मिल सकी.

8. प्रताप सारंगी: 66 साल

2019 में ओडिशा के बालासोर से लोकसभा सांसद बने. सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के साथ पशुपालन, डेयरी व मछली पालन मंत्रालय के राज्यमंत्री थे.

क्यों हटाया गया: शुरुआत में अपनी सादगी को लेकर चर्चा में रहे, लेकिन बाद में मंत्रालय चलाने को लेकर उनके फैसले कुछ खास बदलाव नहीं ला सके.

9. संजय धोत्रे: 62 साल

महाराष्ट्र के अकोला से लोकसभा सांसद. मोदी मंत्रिमंडल में शिक्षा राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और सूचना मंत्रालय में राज्य मंत्री थे.

क्यों हटाया गया: बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर जाना पड़ा.

10. रमेश पोखरियाल निशंक: 61 साल

उत्तराखंड के 5वें मुख्यमंत्री रह चुके हैं. हरिद्वार से लोकसभा सांसद. मोदी 2.0 में मानव संसाधन विकास मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे.

क्यों हटाया गया: कोरोना के बीच नई शिक्षा नीति पर सरकार का पक्ष ठीक से नहीं रख पाए. साथ ही कुछ शिक्षण संस्थाओं ने उनके खिलाफ शिकायतें की थी.

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